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जौनपुर : लोक निर्माण विभाग व पालिका की चक्की में पिस रहे नागरिक


कच्छप गति से चल रहा निर्माण, जनता बेहाल, व्यापार चौपट


सो सो कर जाग रहा है प्रशासन, डेढ़ वर्ष में महज 800 मीटर नाली व सड़क निर्माण अधूरा



शाहगंज।
रवि शंकर वर्मा
तहलका 24x7
                 जनपद में विकास की गंगा किस कदर बह रही है शाहगंज नगरवासियों से बेहतर कोई महसूस नहीं कर सकता है। प्रशासन डेढ़ वर्षों में कई बार अपनी चिर निद्रा से बाहर आ चुका है लेकिन शाहगंज रहवासियों की व्यथा जस की तस है। विगत डेढ़ वर्ष से ज्यादा समय से नगरवासियों को सड़क चौड़ीकरण के नाम पर मानों पूरी तरह से तबाह करने का मन बना लिया गया हो। मुख्यमार्ग के दुकानदारों का व्यवसाय तो पूरी तरह चौपट ही हो गया है रहवासी भी पूरे दिन जाम की समस्या, प्रेशर हार्न और धूल-मिट्टी से दमा और चिड़चिड़ेपन के मरीज हो रहे हैं। 

मुख्यमार्ग पर जाम के कारण नगर की सकरी  गलियों में भी वाहनों की आवाजाही से व्यवसायी स्थानीय प्रशासन की करतूत से परेशान हैं। ऐसे में लोगों को रोजी रोटी के लाले पड़ गए हैं। सबसे खास बात है कि सड़क चौड़ीकरण के नाम पर हुए तोड़फोड़ के बाद आज तक सड़क चौड़ी नहीं हो सकी। नाली निर्माण का काम पूरा नहीं हो सका। इसके बाद के निर्माण कार्य की लम्बी फेहरिस्त है। फिलहाल नाली का काम पूरा होने के बाद नगर पालिका परिषद द्वारा पेयजल की पाइप लाइन और पटरी बनाने का काम करेगी। तोड़फोड़ के कारण टूटी पाइप लाइन से लोगों के घरों में संक्रामक रोग से भरा गंदे पानी की सप्लाई जारी है। विद्युत विभाग द्वारा सड़क से बिजली के खम्भों को हटाकर उसे सड़क किनारे भी किया जाना है। इसमें कितना समय लगेगा, बता पाना मुश्किल है। क्योंकि सभी विभागों का हाल कमोबेश वही है जो लोक निर्माण विभाग का है।

#  प्रदेश से लेकर केंद्र तक भाजपा सरकार फिर भी निर्माण में आ रहा रोड़ा


लोगों का कहना है कि केंद्र व राज्य में भाजपा की सरकार होने के साथ साथ नगर की चेयरमैन भी भाजपा की ही हैं। नगर में उनके समर्थक भी ज्यादातर भाजपाई सभासद भी हैं। यही नही प्रदेश के नगर विकास मंत्री गिरीश यादव का गृह जनपद भी है। इतना सब होते हुए भी नगरवासियों की समस्याओं का निदान समय से न होना बड़ा प्रश्न चिन्ह खड़ा करता है? नपा की लचर रवैये व पीडब्ल्यूडी की मनमानी से बीते लोकसभा चुनाव में स्थानीय लोगों ने भाजपा के खिलाफ वोटिंग का मूड बनाया था। अपना सांसद नया चुनेंगे और वह कर दिखाया। नगर वासियों का कहना है कि सरकार की दोहरी नीति के चलते नगरवासियों को बेवजह चौड़ीकरण के नाम पर बार बार परेशान किया जा रहा है। जबकि हैरत की बात है कि डेढ़ वर्ष पूरे हो गए है नगर के मेन रोड पर सिर्फ 800 मीटर दूरी तक नाली व सड़क निर्माण नहीं हो सका। स्थानीय प्रशासन द्वारा जितनी तेजी से बार बार अवैध निर्माण को ढहवाया जा रहा है उतनी तेजी से निर्माण कार्य नही किया जा रहा है। आखिर क्यों ?



#  सो सो कर जाग रहा है प्रशासन, डेढ़ वर्ष में महज 800 मीटर नाली व सड़क निर्माण अधूरा


स्थानीय प्रशासन सो सो कर जाग रहा है। विगत तीन जनवरी को अतिक्रमण हटाने का कार्य किया गया था। पांच महीने बाद पुनः प्रशासन जागा और 12 जून को फिर कुछ अतिक्रमण को हटाने का काम कराया गया। जबकि जनवरी से मई तक के समय मे नाली व सड़क बन सकती थी परंतु निर्माण कार्य पूरा नही हो सका।

#  नगर में फैल सकती है संक्रामक बीमारी


चौड़ीकरण के बाबत पूरे नगर की नालियां आज भी चोक है। ऐसे में अगर समय रहते नालियों की सफाई नही की गई व सड़क निर्माण पूर्ण नही हुआ तो बरसात के समय पूरा नगर झील में तब्दील होगा। और गंदगी से संक्रामक बीमारी फैलने से इंकार नही किया जा सकता।

#  मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल पर भी शिकायत का निदान नही करते नपा ईओ


दो वर्ष पूर्व सड़क चौड़ीकरण का सिलसिला जब शुरू हुआ तो बड़ी गाड़ियां नगर के अन्य सड़कों पर दौड़ने लगीं। पालिका द्वारा कोई प्रतिबंध नही लगाया गया। जिससे नगर की सभी सड़कें टूटकर बिखर गयीं। नालियों पर बने पुलिया क्षतिग्रस्त हो गए। इस लापरवाही से सरकार को भारी राजस्व क्षति भी होना तय है। क्योंकि नगर की सड़कें हाल में ही बनी थीं। टूटी सड़कों व नगर में भीषण दुर्गंध युक्त कूड़ों के ढ़ेर से संबंधित समस्या की शिकायत मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल पर भी की गयी। परन्तु ईओ द्वारा मुख्यमंत्री की आदेशों की धज्जियां उड़ाते हुए कोई कार्यवाही नही की गयी। जिससे स्वच्छ भारत मिशन का खुलेआम पलीता लगाया जा रहा है।



#  नालियां व बिजली खंभे जस के तस


पीडब्ल्यूडी, विद्युत विभाग व नपा की गजब की लापरवाही के चलते बिजली के खंभे चौड़ीकरण के चलते सड़कों पर ही खड़े हैं।सबसे खास बात है कि डेढ़ वर्ष से ज्यादा समय बीत जाने पर भी खंभो को नही हटाया जा सका। जबकि इससे बड़ा हादसा हो सकता है। क्या सड़क व नाली बनने के बाद पुनः तोड़फोड़ कर के खंभो को हटाने का कार्य किया जाएगा? वहीं गौर किया जाय तो मेनरोड की दोनों पटरियों की नालियां लगभग पूर्व की ही जगहों पर बन रही हैं।तो चौड़ीकरण का मतलब ही क्या है?

#  नगर की समस्याओं की उच्चस्तरीय जांच हो तो नप सकते है बड़े अफसर


चौड़ीकरण से होने वाली समस्याओं व निर्माण कार्यों में होने वाली धांधली की उच्चस्तरीय जांच होने पर जिले के कई बड़े अफसर नप सकते हैं। कई निर्माण कार्यों में गड़बड़झाला है। फिलहाल यहां की समस्याओं से संबंधित मामला कोर्ट तक पहुंचा  है। अब देखना यह है कि अधिकारी किस तरह से जवाबेही की अर्जी लगाकर खुद को खरा और पाक-साफ साबित करते हैं।


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रवि शंकर.
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